समय का पहिया चलता है
इस पहिए के संग सभी का भाग्य बदलता है
समय का पहिया चलता है।
सहज पके सो मीठा होए
पतवार के बिना ही मेरी नाव चल रही है
हैरान है जमाना मंज़िल भी मिल गई है
मंज़िल भी मिल रही है।
तुम साथ हो जो मेरे किस चीज़ की कमी है
इतनी धुरंधर विदुषी स्त्री समय की
ठोकरों व उथल-पुथल से निखर
कर अनमोल हीरा बनीं।
मंडी अहमदगढ़ की गर्ग पुत्री सुनाम
के सिंगला परिवार की पुत्रवधू बनी।
जब तक सूरज चाँद रहेगा गर्ग पुत्री पुष्प
सिंगला का नाम रहेगा।
सकल पदार्थ हैं
जग माहीं कर्महीन नरपावत नाहीं।
धर्म की जय हो अधर्म का नाश हो।
नींव कहीं दिखाई नहीं देती परन्तु भवन की मजबूती नींव
की मजबूती पर ही निर्भर रहती है।
एडवोकेट पुष्प सिंगला ने समाज की स्त्रियों के
पथपथ-प्रदर्शन की अच्छी नींव रखी है।





