प्राचीन अवशेषों की खोज:
(जोगिन्दर)
सुनाम उधम सिंह वाला के प्राचीन सीतासर सरोवर के पास कुषाणकालीन सीढ़ियां (1 फीट लंबी और 1 फीट चौड़ी ईंटों से बनी) सरोवर के भीतर से बाहर की ओर आ रही हैं।
महाशिवरात्रि की सफाई के दौरान खुलासा: महाशिवरात्रि पर्व की तैयारी के तहत सरोवर की सफाई करते समय मंदिर प्रबंध समिति के प्रतिनिधियों ने इन ऐतिहासिक सीढ़ियों को देखा।
सिक्कों व ऐतिहासिक अवशेषों की प्राप्ति: स्थानीय इतिहासकार रामेश्वर दास और पुरातत्वविद जिंदल के अनुसार, सरोवर के आसपास करीब 300 वर्ष पुराने प्राचीन सिक्के और कुषाणकालीन अवशेष मिले हैं।

धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व: मान्यता है कि प्राचीन काल में श्रद्धालु सरोवर में स्नान करने के बाद मंदिर में सिक्के चढ़ाते थे। यह स्थान हजारों वर्ष पूर्व अध्यात्मिकता का मुख्य केंद्र रहा है।
सरोवर के चारों ओर बिखरी धरोहर: सरोवर के चारों तरफ कुषाणकालीन ईंटें, प्राचीन सीढ़ियां और अन्य ऐतिहासिक अवशेष उपेक्षित अवस्था में पड़े हैं।
पुरातत्व विभाग से खुदाई की मांग: एएसआई (ASI) की टीम कई बार यहां आकर विजिट कर चुकी है, लेकिन अवशेषों को संरक्षित नहीं किया गया है।
नोट
कुषाण वंश का सबसे प्रसिद्ध शासक कनिष्क था, जिसका शासनकाल लगभग 127 ईस्वी से 150 ईस्वी (आज से लगभग 1,875 से 1,900 वर्ष पहले) रहा।
सुनाम शहर का प्राचीन सीतासर धाम 2500 से 3000 हजार साल पुराना स्थान है
जिसे लोग सिरा नाम का अपयोग कर इस की पवित्रा को ठेस पहुंचi रहे हैं





