“उम्मीदों के दिए लेकर
यह सब तेरे लिए लेकर
जिन्दगी आ रहा हूँ मैं।”
वह हमेशा कहती कि अब तो मैं अपने घर जाऊँगी, जैसे उन्हें अपना पति और पुत्र स्पष्ट नज़र आ रहे हों।
भाई गुरदास कॉलेज संगरूर से डिग्री प्राप्त पुत्री लवलीन सिंगला का सदमा वह बिल्कुल नहीं भूल पाई।
3 अगस्त 2025 को एडवोकेट लवलीन सिंगला पुत्री दर्शन का लाइसेंस तैयार हुआ, जिसे लेकर आने की तैयारी चल रही थी। 31 अगस्त 2025 को उनकी बेटी सदा की नींद सो गई।
झण्डा ऊँचा रहे हमारा।
मंडी अहमदगढ़ की गर्ग पुत्री, सुनाम की सिंगला परिवार की पुत्रवधू।
जब तक सूरज चाँद रहेगा, गर्ग पुत्री पुष्प सिंगला का नाम रहेगा।
ऐसा भी वक्त आता है जब खुद को तपाकर सोना बनाने को जी चाहता है।
आशाओं की राह पर विश्वास के—
2) कदम बढ़ाने पड़ते हैं बिना रुके।
अचानक ही आप पहुँच जाते हैं वहाँ, जहाँ मुस्कुराते हुए आपका इंतजार कर रही है आपकी मंजिल।
आपकी जीत / आपका विश्वास / आपकी प्रीत / आपकी आशा / आपकी रीत।





