दोराहा (नजदीक खन्ना) जैसे वृद्धाश्रमों में देवकी बुआ जैसी हजारों विधवाएं बैठी सिसकियां भर रही हैं। क्या हुआ जो पति की मौत के बाद बेटों ने त्याग दिया, भाई-भतीजे अपना लेते, उनसे भी तो पारिवारिक रिश्ता है।
कोसती हैं उन लोगों को जिन्होंने आश्रम प्रथा चलाई। पता नहीं कुछ लोगों को अपनी बहू या बेटी की कोई परवाह ही नहीं होती।
एडवोकेट पुष्प सिंगला नैतिकता की समर्थक थी, लेकिन उन्हें भी कोई सुख नहीं मिला।
स्थान: दोराहा, नजदीक खन्ना।




