चंदू और क्यारियों में सरसों,
नव-पीली पीली फूली।
सौंदर्य निरख जिसका मेरा,
मन की व्याकुलता भूली थी।
ये वर्ण-वर्ण के फूल खिले,
अनुपम शोभा देते थे।
किस मन से करूँ वर्णन उनका,
मन की तो वे हर लेते थे।
सहसा पुष्प एक दिख पड़ा,
जिसकी शोभा का अंत न था।
डग भरता जब उस ओर बढ़ा,
खिल-खिल कर फूल ने हँस दिया।
हे प्रसून! लघु तेरा जीवन,
फिर भी यश लेकर जाता है।
यह समय अमूल्य गँवा कर तू,
पीछे पछतावा जाता है।
सूरज, चंदा, तारे, जुगनू सबकी हस्ती है,
जिसमें जितना नीर, वो बदरी उतनी देर बरसती है।
जब तक सूरज-चाँद रहेगा,
पुष्प सिंगला तेरा नाम रहेगा।
मंडी अहमदगढ़ और सुनाम की पहली महिला वकील
ले ले औरों का भार,
हिम्मत न हार।
चल, चला चल अकेला,
चल, चला चल।
तेरी शक्ति अपार,
तू तो लाया रे अकेला
गंगा स्वर्ग से उतार।
चल, चला चल।





