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समय की धार में संघर्ष से इतिहास तक | पुष्प सिंगला

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है समय नदी की धार,
कि जिसमें सब बह जाया करते हैं।
है समय बड़ा तूफ़ान प्रबल,
पर्वत झुक जाया करते हैं।

अक्सर दुनिया के लोग
समय में चक्कर खाया करते हैं,
लेकिन कुछ ऐसे होते,
जो इतिहास बनाया करते हैं।

ले ले औरों का भार,
कोई जिनका नहीं है, उनका जीवन सँवार।
हिम्मत न हार,
चल, चला चल अकेला, चल।

अहमदगढ़ की बेटी, सुनाम की पुत्रवधू, पहली महिला वकील।

ज़िंदगी हर कदम एक नई जंग है,
जीत जाएँगे हम — 2, तू अगर संग है।

जब तक सूरज-चाँद रहेगा,
“पुष्प सिंगला, तेरा नाम रहेगा।”